Uttarakhand Floods : उत्तराखंड की त्रासदी में लापता हुए लखीमपुर के 60 से अधिक मजदूर

केदारनाथ आपदा 17 जून 2013 को आई थी, इसके बाद लगातार उत्तराखंड पर भौगोलिक वातावरण को लेकर सवाल उठते रहे हैं , कि क्या वाकई प्रकृति को नजर अंदाज करके कुछ भी बनाया जा सकता है,उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं रोड पर प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए थे बात यह थी कि उत्तराखंड में करीब एक लाख पेड़ काटे जाने थे इसको लेकर बच्चों ने प्रकृति के ऊपर अत्याचार और सेव ट्री के नाम से कई मुहिम छेड़ा और आखिरकार हाई कोर्ट को इसमें दखल देकर इस पर रोक लगानी पड़ी है,कोई बुद्धिजीवी तो यह भी कहते हैं कि केदारनाथ ,बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग , यमुनोत्री, गंगोत्री, चंबा चमोली , करणप्रयाग, देवप्रयाग तपोवन, ऋषिकेश ये तमाम धार्मिक स्थल पहले जितना मजबूत नहीं रहे हैं कारण यह है कि लगातार उत्तराखंड में हो रहे खनन पहाड़ों को तोड़कर रास्ता बनाना प्रकृति का नुकसान करना जैसी तमाम चीजें लगातार होती रही है यही कारण है कि जून 17 2013 कोलापता हो गए थे , वह त्रासदी जिसने अपने आंखों से देखी वह आज भी भूल नहीं पाता है , जिन्होंने बच्चे परिवार मां-बाप खोए आज भी केदारनाथ जाने से डरते है

Uttarakhand Floods : उत्तराखंड की त्रासदी में लापता हुए लखीमपुर के 60 से अधिक मजदूर

केदारनाथ आपदा 17 जून 2013 को आई थी, इसके बाद लगातार उत्तराखंड पर भौगोलिक वातावरण को लेकर सवाल उठते रहे हैं , कि क्या वाकई प्रकृति को नजर अंदाज करके कुछ भी बनाया जा सकता है,उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं रोड पर प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए थे बात यह थी कि उत्तराखंड में करीब एक लाख पेड़ काटे जाने थे इसको लेकर बच्चों ने प्रकृति के ऊपर अत्याचार और सेव ट्री के नाम से कई मुहिम छेड़ा और आखिरकार हाई कोर्ट को इसमें दखल देकर इस पर रोक लगानी पड़ी है,कोई बुद्धिजीवी तो यह भी कहते हैं कि केदारनाथ ,बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग , यमुनोत्री, गंगोत्री, चंबा चमोली , करणप्रयाग, देवप्रयाग तपोवन, ऋषिकेश ये तमाम धार्मिक स्थल पहले जितना मजबूत नहीं रहे हैं कारण यह है कि लगातार उत्तराखंड में हो रहे खनन पहाड़ों को तोड़कर रास्ता बनाना प्रकृति का नुकसान करना जैसी तमाम चीजें लगातार होती रही है यही कारण है कि जून 17 2013 कोलापता हो गए थे , वह त्रासदी जिसने अपने आंखों से देखी वह आज भी भूल नहीं पाता है , जिन्होंने बच्चे परिवार मां-बाप खोए आज भी केदारनाथ जाने से डरते है

ऐसे तो उत्तराखंड में बादल फटने की खबरें ठंडी के मौसम में आम बात हो जाती है शिवपुर ऋषिकेश करणप्रयाग देवप्रयाग में बादल फटना कोई बड़ी बात नहीं है कई बार बारिश के समय भी बादल फटने की खबर आती है और हल्की-फुल्की भूस्खलन और पहाड़ियों की टूटने की खबर और यातायात को बाधित करने वाली खबरें सामने आती रहती है।

कल यानी 7 फरवरी 2021 को जो हुआ वह 2013 के बाद से उत्तराखंड की सबसे बड़ी त्रासदी के नाम में जुड़ जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक करीब डेढ़ सौ से अधिक लोग लापता हैं और कई लोगों को बचाया जा चुका है आइटीबीपी, बीआरओ , एनडीआरएफ, आर्मी, की जवान लगातार लोगों को खोजने में जुटे हुए हैं ।
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने से लखीमपुर उत्तर प्रदेश के 60 से अधिक मजदूर के लापता होने की खबर सामने आई है ,यहां कई परिवारों का अपनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है जिसके बाद परिजन परेशान है यह सभी मजदूर पावर प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए गए हुए थे बीते दिवस ग्लेशियर फटने के खबर ने सभी परिवारों का चयन छीन लिया है। को बता दें कि जिसके फटने के कारण बन रही सुरंग पूरी तरह से ढक गई और पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया।
गौरतलब है कि चमोली में प्ले सिर फटने की सूचना के बाद से हरिद्वार ऋषिकेश शिव नगर में अलर्ट जारी कर दिया गया है एसडीआरएफ की दृष्टि में राहत बचाव कार्य में जुटी हुई है। आइटीबीपी की टीम
 भी लगातार अभियान चलाकर लोगों को खोज रही है इसलिए सभी क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया है सभी से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की गई है इस तबाही में कई लोग के बहने की सूचना मिल रही है डैम पर काम कर रहे लोगों के लापता होने की सूचना भी आ रही है |