समय का खेल,कभी भारत था अमेरिका का कर्जदार आज अमेरिका बना भारत का कर्जदार

एक वो दौर था जब भारत ने अनाज की कमी होने पर अमेरिका से मदद मांगी थी। और आज वो समय है जब दुनिया के सुपर पॉवर में सुमार अमेरिका ने कोरोना से जंग में भारत की मदद मांगी है और भारत देश इससे पीछे भी नहीं हटा और अमेरिका की मदद की .... (पूरा पढ़े )

समय का खेल,कभी भारत था अमेरिका का कर्जदार आज अमेरिका बना भारत का कर्जदार
समय का खेल,कभी भारत था अमेरिका का कर्जदार आज अमेरिका बना भारत का कर्जदार

समय का खेल,कभी भारत था अमेरिका का कर्जदार आज अमेरिका बना भारत का कर्जदार 

कहते है ना एक दिन सबका वक्त आता है | आज ये बात बिलकुल सही साबित हो रहा है | एक वो दौर था जब भारत ने अनाज की कमी होने पर अमेरिका से मदद मांगी थी। और आज वो समय है जब दुनिया के सुपर पॉवर में सुमार अमेरिका ने कोरोना से जंग में भारत की मदद मांगी है और भारत देश इससे पीछे भी नहीं हटा और अमेरिका की मदद की । बता दे इस वक्त कोरोना वायरस से अमेरिका में हालात काफी खराब है और अब तक वहा पर हजारों लोगों की जान जा चुकी है। दरसल कोरोना से परेशान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) दवा मांगी थी।

भारत ने भी ट्रंप की अपील मानी और वॉशिंगटन को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई भेजी। हालांकि ट्रंप ने कुछ वक्त पहले दवा ना देने पर जवाबी कार्यवाही की धमकी भी दी थी | लेकिन भारत ने दरियादिली दिखा कर ये साबित किया की हम किसी कि मदद करने से पीछे नहीं हटते चाहे वो कोई भी हो | 1951 से आज 2020 तक दुनिया में कई बड़े बदलाव हुवे । इस वक्त में दुनिया में भारत सबसे तेजी से उभरने वाला अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब वो देश जिसने कभी अनाज के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी आज वो उनकी मदद कर रहा है | एक वो वक्त था जब दुनिया में दो गुट थे- अमेरिका और सोवियत संघ. भारत  उस वक्त नया-नया आज़ाद हुआ था. दोनों गुट  भारत को अपने पाले में लेना चाहते थे. मगर नेहरू जी सदैव गुटनिरपेक्षता के हिमायती थे. उनका मांनना था  की  भारत दो विश्वशक्तियों के बीच पीस जाएगा और कभी तैराकी नहीं कर पाएगा | इस वजह से अमेरिका नाखुश था.जब  देश में अनाज की बेहद किल्लत थी.


 तब भारत अपना खाद्य संकट दूर करने के लिए अमेरिका की मदद चाहता था. लेकिन  मदद मांगते हुए भी नेहरू अमेरिका के आगे झुकना  नहीं चाहते थे. . ट्रूमैन अनाज की कीमत समझते थे. ख़ुद किसानी कर चुके थे. परिवार किसान था उनका. बावजूद इसके नेहरू को निराशा हाथ लगी. भारत की नॉनअलाइमेंट की विदेश नीति से खार आए ट्रूमैन ने उस वक्त मदद नहीं दी. गुटनिरपेक्षता के अलावा चीन, कोरियन युद्ध, पश्चिमी देशों के साम्राज्यवाद जैसे दुनियावी मसलों पर भी नेहरू की राय अलग थी. अमेरिकी प्रभाव से स्वतंत्र थी.

नेहरू ने कई मीटिंग्स की. कई सभाओं को संबोधित किया. मगर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. |ट्रूमैन और नेहरू, दोनों एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे. हालांकि बाद में स्थितियां कुछ हद तक बदली . चीन पर कम्युनिस्ट शासन हो गया. भारत में कम्युनिस्ट सत्ता नहीं थी. इसके साथ दोस्ती बढ़ाना अमेरिकी हितों के लिए ज़रूरी हो गया. और शायद इसलिए  12 फरवरी 1951 को हैरी एस ट्रूमैन ने भारत को अनाज की कमी से निपटने के लिए कांग्रेस में भारत को 20 लाख टन आपात मदद की अनुशंसा की थी। उन्होंने कहा, 'हम भारत की अपील पर बहरे बने नहीं रह सकते हैं।'


तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने कहा था, 'भारत के लोगों के प्रति हमारी दोस्ती और लोगों को भूखे नहीं रहने देने की हमारी चिंता ही हमें यह कदम उठाने को प्रेरित कर रही है। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति के संदेश को भारत की अनाज की कमी को दूर करने के मानवीय आधार पर देखा गया उन्होंने उस वक्त कहा था कि भारत के लोगों के प्रति हमारी दोस्ती और लोगों को भूखे नहीं रहने देने की हमारी चिंता ही हमें यह कदम उठाने को प्रेरित कर रही है। उस समय शायद अमेरिका ने इसलिए भी मदद की थी क्योंकि वो भारत को ये एहसास दिलाना चाहता था कि नई दिल्ली का असली हित पश्चिमी देशों के साथ  है। दरअसल उस समय भारत की चीन की नीतियों को लेकर तल्ख था| फिर भी अमेरिकी कांग्रेस ने लंबी बहस के बाद भारत को अनाज भेजने को अपनी रजामंदी दी।


काफी साल निकल गए है और अब समय  भी काफी बदल गया है। अब अमेरिका और भारत के सम्बन्ध काफी बेहतर हो गए है। भारत आज खाद्यान उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है और कई बड़े  बड़े चीजों का निर्यात भी करता है। वैसे तो सबको पता है की डोनाल्ड ट्रंप कई बार कई अवसरों पर पीएम मोदी की तारीफ करते नहीं थकते और अब अमेरिका भी भारत का लोहा मानता है। अभी हाल ही में भारत ने अमेरिका को कोरोना से जंग क लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भेजी है |

कोरोना वायरस आज एक वैश्विक महामारी बन कर सबको अपने चपेट में ले चुका है |  भारत में भी इसका संक्रमण काफी ज्यादा है अब तक कई लोगो की जान भी जा चुकी है और इस वक्त  मलेरिया की दवा कोरोना में इस्तेमाल हो रही दरसल ये दवा कुछ हद तक कोरोना से लड़ने में कारगर है|  हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा भारत में सबसे ज्यादा बनाई जाती है|  यही वजह है  की अमेरिका ने भारत से मदद मांगी है और भारत ने भी अमेरिका की मदद की जिसकी वजह से ट्रंप ने भारत के पीएम की काफी तारीफ की भी की । उन्होंने पीएम मोदी और भारतीय लोगों का धन्यवाद करते हुए अपने ट्वीट में कहा कि भारत की इस मदद को भुलाया नहीं जाएगा। शायद आज भारत ने अमेरिका का वो कर्ज उतर दिया है |