किसान आंदोलन की रफ़्तार रोकने की भाजपा की रणनीति

राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन विकराल रूप लेता जा रहा है। जहां एक ओर किसान यूनियन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है।  किसान कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर डटी है। सबसे ज्यादा पंजाब,हरियणा ,राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान सड़कों पर उतर गयी है।  वहीं दूसरी ओर सरकार भी अपनी ज़िद पर अणि है। और कृषि कानून को वापस लेने के पक्ष में नहीं है। इसी  बढ़ती  भाजपा हर मुमकिन प्रयास में  किसानो को इस क्रांति से पीछे हटाया जा सके।

किसान आंदोलन की रफ़्तार रोकने की भाजपा की रणनीति

राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन विकराल रूप लेता जा रहा है। जहां एक ओर किसान यूनियन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है।  किसान कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर डटी है। सबसे ज्यादा पंजाब,हरियणा ,राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान सड़कों पर उतर गयी है।  वहीं दूसरी ओर सरकार भी अपनी ज़िद पर अणि है। और कृषि कानून को वापस लेने के पक्ष में नहीं है। इसी  बढ़ती  भाजपा हर मुमकिन प्रयास में  किसानो को इस क्रांति से पीछे हटाया जा सके।

किसानो की आंदोलन को ठंडा करने के लिए भाजपा ने एक नई मुहीम की शुरुआत की है। भाजपा ने अब किसानो के आंदोलन के सन्दर्भ में उन्हें मानाने के उद्देश्य से सम्मलेन का आयोजन करने की घोषणा की है। बता दे की कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानो को उत्तर प्रदेश बात चित कर मनाएगी भाजपा  सरकार। इस दौरान उत्तर प्रदेश के किसानो से रूबरू होकर कृषि कानूनों की बारीकियों को बताएगी भाजपा बल। बता दे की 15 से 18 दिसंबर तक चलायी जाएगी जब राज्य के अलग अलग शहरों में भाजपा के पदाधिकारी मौजूद होकर किसानो की समस्याओं पर आधारित सम्मलेन करेंगे। बता दें सम्मलेन में उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री भी इन किसान सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

सम्मलेन काफी बढे मंच  पर करने की योजना बनाई गयी है जो 15-18 दिसंबर तक चले जाएगा। चार दिवसीय इस सम्मलेन में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बनारस में ,प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह गोंडा में ,जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह मुरादाबाद ,मंत्री मुकुट बिहारी अमेठी में ,नीलकंठ तिवारी प्रतापगढ़ में किसान सम्मेलन में उपस्थित होंगे।